झिलमिल और चिलमिल

सुबह-सुबह अधिकारी अंकल सीढ़ियों से उतरते हुए हैप्पी(स्वान) को दुलारते हुए आ रहे थे। झिलमिल और चिलमिल (बिल्ली की नवजात) कोने में दुबकी हुई म्याऊं म्याऊं की आवाज निकाल रही थीं।दोनों की माँ चुलबुली शायद बाहर चली गई थी। रिया अक्सर ही दोनों के लिए बाहर दूध की कटोरी रख देती थी। ऐसे में दोनों की भूख तो मिट चुकी थी, लेकिन हैप्पी की आवाज सुनकर दोनों फिर से डर गई थीं। अधिकारी अंकल दोनों को पुचकारते हुए हैप्पी को लिए बाहर चले गए। जब से झिलमिल और चिलमिल नई मेहमान के रूप में आई थीं, बिल्डिंग के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि आसपास तक के बच्चों के मनोरंजन का साधन हो चुकी थीं। 

समय ठंड के मौसम का था, ऐसे में किसी ने बचाव के लिए एक कंबल भी रख दिया था। दिनभर दोनों मां के साथ उछलकूद मचाती रहती थीं। लोगों का मन भी लगा रहता था। जैसे जैसे दोनों बड़ी होने लगीं कुछ बाहर भी जाने लगीं। बाहर उनका सामना बड़े स्वानों के साथ था। ऐसे में डरकर वह दुबककर अंदर ही थीं।एक दिन अचानक रात 2 बजे घर पहुंचा तो हमले में घायल दोनों कराह रही थीं।आखिरकार सुबह दोनों की अनचाही मौत ने हम सबसे विदा किया। झिलमिल चिलमिल की अधूरी अनोखी कहानी।

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