अमेरिका से आया मेरा दोस्त

 सेंट जेवियर्स कॉलेज(पार्क स्ट्रीट) का नाम लेते ही बहुत सारी यादें ताजा हो उठती हैं। भले ही केवल यहां 2 साल रहा लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि मानो शुरू से ही बड़ा जुड़ाव यहां से रहा हो। अब चाहे फादर पीसी मैथ्यू हों या फिर फादर पी इटन सभी का लाड दुलार हम सबको मिला। खासकर हमारे हिस्ट्री की प्रोफेसर प्रोफेसर मिसिज एस. रे का विशेष आशीष मुझे शुरू से ही मिला। खैर बात हो रही है अचानक  कॉलेज की तो यहां के कई मित्र हैं जिन्हें की मैं नहीं भूल सका, ना ही वही मुझे भूल सके। इनमें सबसे खास रहे हैं शुरू से ही गॉडविन कुजूर। इसके अलावा एडविन कुजूर, मीरन टोप्पो, अजय एक्का, विकास एक्का, अभिषेक बनर्जी, अभिषेक डालमिया, पारस सोमानी और राम हरित। इसमें से कई मित्र अभी भी अपने काफी संपर्क में हैं। वैसे ज्यादातर मित्र कहीं ना कहीं बड़े ओहदे पर या फिर किसी दूसरे देश में जा बसे हैं। लेकिन हमारे अजीज मित्र राम हरित भाई अमेरिका जाने के बाद भी हमेशा संपर्क में रहे। भले ही कभी कभार ही सही हमारी सोशल मीडिया या अन्य माध्यम से बातचीत होती रही है, लेकिन संपर्क कभी टूटा नहीं। कई साल बाद राम हरित भाई अमेरिका से इस बार कोलकाता आए थे। ऐसा लग रहा था कि हम दोनों की मुलाकात नहीं हो पाएगी, क्योंकि व्यस्तता भरा समय दोनों का ही था। उन्हें भी कई सारे वैवाहिक कार्यक्रम में हिस्सा लेना था और मुझे भी मौसी के यहां वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होना था। लेकिन आखिरकार हम लोग एक दूसरे से मिले और यू मिले मानो कि हम अक्सर मिलते ही रहते हैं। दरअसल मित्रता ऐसी ही होनी चाहिए कि आपको ऐसा कभी प्रतित ही ना हो कि आप एक दूसरे से दूर हैं। दूरियों के बावजूद अपनापन हमेशा मौजूद रहना चाहिए, यही तो मित्रता की खासियत होती है। यह भी याद रखने की जरूरत है कि हम अपने-अपने कार्य में व्यस्त हैं और किसी को कोई कुछ दे नहीं रहा है, लेकिन इसी बहाने कम से कम आपको अपने पुराने समय की याद तो ताजा ही जाती है। यही वजह है कि पुराने मित्रों को कभी भूलना नहीं चाहिए और यदि मौका मिले तो जरूर से मिल लेना चाहिए। हमारे एक मित्र उत्तरपाड़ा में रहते हैं जो कि कई बार कहते हैं कि मिलेंगे मिलेंगे लेकिन इतने नजदीक होने के बाद भी उनसे सालों में ही मुलाकात हो पाती है। खैर बात हो रही है राम हरित भाई की तो राम हरित जी ने सीए की पढ़ाई करने के बाद विदेश का रुख किया और वह अब अमेरिका में जाकर बस चुके हैं वह भी परिवार के साथ। अब वहीं उनका रहना हो रहा है। वह बताते हैं कि बड़ी संख्या में अब भारतीय वहां निवास करते हैं ऐसे में वहां भी सहजता के साथ वह रहते हैं। अब अगली बार राम भाई का आना भारत यानी कि कोलकाता में आना कब होगा यह तो पता नहीं लेकिन वह बिल्कुल नाम के अनुरूप ही राम जैसे ही हैं। सादगी का ऐसा रूप अब बहुत कम देखने को मिलता है। हमारे लिए यह बहुत खुशी की बात है कि कुछ दोस्त आज भी याद रखते हैं, वह भी हमारे जैसे व्यक्ति को जो कि शायद किसी काम का नहीं है उनके लिए। राम भाई बताते हैं कि विदेश में चार पहिया रखना एक तरह से अनिवार्य सा होता है, क्योंकि अभी भी वहां पर जनसंख्या काफी नियंत्रण में है। ऐसे में वहां एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए चार पहिया ही एकमात्र बढ़िया माध्यम रहता है। दो पहिया तो लोग केवल शौक के लिए वहां रखते हैं। वैसे और भी काफी बातें उन्होंने बताई जो की कभी और शायद साझा की जाए। लेकिन बेलगछिया मेट्रो उतरने के बाद हम दोनों ने ही में घण्टों समय बिताया और उसी दिन उनकी फ्लाइट भी थी। इसके बावजूद वह समय लेकर मिलने के लिए आ गए, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद मित्र। आप में राम जी का चरित्र वास करे, यही कामना है। आप और भी आगे बढ़ें, इसी में हम सब की खुशी है। जेवेरियन्स विल ऑलवेज रॉक। गुड लक दोस्त। वैसे वह अमेरिका के ट्रेसी में रहते हैं। 

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