अकेला जी
अकेला जी का नाम कैसे पड़ा अकेला... अकेला जी कभी अकेले नहीं थे। वह हमेशा किसी न किसी के साथ थे। वैसे उनका पूरा नाम बद्री प्रसाद अकेला था। फ़ोटो जर्नलिस्ट के तौर पर कभी हमारे साथ, कभी जगदीश यादव तो कभी लखन भारती तो कभी सुशील मिश्रा(हुगली वाले) के साथ वह फील्ड में रहे।वैसे वह जुझारू थे। अकेले ही निकलने में माहिर रहे।कई बार ऐसा प्रतीत होता है कि उनके काम का सही मेहनताना शायद उन्हें नहीं मिला। इसकी वजह है कि मेहनत करना तो उनके खून में था। शायद बचपन से ही संघर्षों के बीच वह पले बढ़े। वह अक्सर बताते थे कि ब्रेसब्रिज स्टेशन के निकट ही उनका घर था।भरे पूरे परिवार के साथ वह रहते थे। उनके जाने की खबर अचानक मिली थी। वह अंधेरे में यूं चले गए जैसे कि एक टिमटिमाता तारा अचानक खो गया। वह किसी तारे से कम नहीं थे खासकर मेरे लिए तो बिल्कुल नहीं। हमारे दुगुनी उम्र के होने के बाद भी वह या तो गुरुजी या फिर पंडितजी कहकर बुलाते थे। उनकी अचानक याद इसलिए आई क्योंकि मटियाब्रूज के पहले पड़ने वाले खिदिरपुर क्षेत्र में था। अकेला जी खिदिरपुर में एक बड़ा नाम थे। भूकैलाश मंदिर परिसर से लेकर आसपास के लोग उन्हें बखूबी जा...