समय निकालें अपनों के लिए

 जीवन उलझनों से घिरा है। हर व्यक्ति उलझा है। जीवन की अजीब पहेलियों को सुलझाने को प्रयासरत है। जीवन की इस आपाधापी में यदि समय मिले तो जमकर आनंद लेने की जरूरत है। लेकिन आनंदरस में इतना न डूब जाएं कि फूफा और जीजा को भूल जाएं। वैवाहिक समारोहों में अक्सर अपने यानी कि नाते रिश्तेदारों का आवागमन तो होता ही है। अब भी यही देखा जाता है कि किसके वैवाहिक समारोह में कितने नात बांत और किन किन शहरों से पहुंचे। खैर इसके बाद बात आती है खातिरदारी की। यदि डीजे न हो तो आजकल के बाराती नाचने को भी तैयार नहीं होते। नागिन डांस पर नाचने की परंपरा अब कम हो गई है। अब तो किसी चलतू भोजपुरिया पर जमकर ठुमके लग रहे हैं। ठीक भी है गाना भले ही समझ के बाहर हो लेकिन नाच के लिए परफेक्ट हो जाता है। बात हो रही है जीजा और फूफा की तो भैया इनकी आवभगत में कमी न रखें। ज्यादा भौकाल न बांधें। सीधे और सपाट बात करें। व्यवस्था टाइट रखें। हो सके तो किसी एक को इनकी सेवा में ही लगा दें। वजह यूं है कि कोई दिल्ली तो कोई मुंबई से नौकरी से कुछ समय की छुट्टी लेकर आता है।उसके समय की कद्र करें। मैं यहां किसी की आलोचना नहीं कर रहा बस एक सन्देश देने की कोशिश है कि आप भी कभी वैवाहिक समारोह में आयोजन प्रबंधक बनते हैं तो सबकी आवभगत का ख्याल रखें, खयाली पुलाव न पकाएं। जीजा और फूफा के मान सम्मा का ध्यान रखें। जैसे हमने हमेशा रखा है। हमारे भाईयों ने रखा है। सम्मान से ही स्वाभिमान है उसमें कोई कमी न रखें। यदि कोई बेवजह मुंह फुलाता है तो गरियाएँ नहीं बल्कि प्यार से अपना बना लें। हर पल को एंजॉय करें जैसे हम सबने किया और कर रहे हैं आगामी दिनों में भी करेंगे। मिलकर रहेंगे। एक साथ जुटकर क्रिकेट खेलेंगे मस्ती के पल निकालेंगे। 

बात आती है फिर से खर्रा रस्तीपुर गांव की। परम्पराओं का अद्भुत दृश्य यहां देखने को ही नहीं बल्कि सुनने को भी मिला।

आवभगत जमकर हुआ।सर्द भरी रात में मंडप के सामने हम सभी बैठे रहे। चाय,काफी और गर्म पानी का खास इंतजाम रहा। लेकिन जैसे ही बरसात गालियों की हुई तो हम सभी ताज्जुब कर गए। ऐसा इसलिए कि वैवाहिक समारोहों में गाली गीत की परंपरा अब समापन की ओर है। लेकिन यहां तो कहना ही क्या। ढोलक की धुन पर एक से बढ़कर एक परम्परागत गालियों की जमकर बौछार हुई।इसका लोगों ने जमकर आनंद लिया। कब सुबह हो गई पता ही नहीं चला। उम्मीद है कि आगे भी ऐसे ही परम्परा कायम रहेगी। गीत गाने वालों को सलाम। फिर ऐसे आयोजनों में हम सब एक साथ जुटेंगे वह भी सम्मान के साथ यही उम्मीद है। विशेष धन्यवाद शिवम, सर्वेश और संदीप जीजा का जिन्होंने हर पल साथ बिताया और इस बार हमने बेहतरीन पल संजोए। फिर मिलेंगे जल्द सम्मान के साथ।

भोलू भाई को नए जीवन में कदम रखने की शुभकामनाएं। आपका जीवन दिव्य हो दिव्या के साथ।

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