नाथों के नाथ प्रभु जगन्नाथ...

  यहाँ भक्ति है।यहां शक्ति है।यह धाम है। हमारे सनातन संस्कृति की पहचान है। प्रभु की माया है।सब कुछ निराला है। कुछ खास है। आप यहां जाते नहीं, बुलाए जाते हैं। प्रभु की ऐसी शक्ति जिसकी भक्ति में सब लीन नजर आते हैं। भीड़ इस कदर कि पहले तो आप भयवश मंदिर में प्रवेश करने से डरेंगे।लेकिन जैसे ही आप पुरी पहुंच गए प्रभु जय जगन्नाथ की गूंज सुनाई देने लगती है। एक चमत्कारिक शक्ति आपको मंदिर की तरफ मानो बुलाने लगती है। एक वृहत्तर क्षेत्र में फैला जगन्नाथ धाम सालों से श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। देश के हर कोने से हर भाषा व संस्कृति के लोग प्रभु दर्शन को पहुंचते हैं। यह भी एक आश्चर्यजनक तथ्य प्रतीत होता है कि जब तक प्रभु न बुलाएं आप दर्शन को नहीं पहुंच सकते हैं। शायद यही वजह है कि लंबे समय से इसके आसपास होने के बावजूद कभी पहुंचने का मौका नहीं मिल सका। उड़ीसा वैसे तो बंगाल की सीमा पर स्थित है , लेकिन जगन्नाथ पुरी धाम का दर्शन अब जाकर करने का मौका मिला। कहते हैं कि किसी धाम पर जब तक प्रभु का बुलावा ना आए किसी का पहुंचना मुश्किल ही रहता है। यही वजह है कि हम सभी मित्रों ने वैसे तो पुरी जाने की योजना कई महीने पहले बना ली थी। लेकिन इस दौरान दो मित्रों ने न जाने की भी बात कही। टाल बहाना भी चला। जिस ट्रेन से हमें जाना था, उसके साथ ही साथ दक्षिण पूर्व रेलवे की करीब 122 ट्रेन इस तिथि में रद्द हो गई थी। उसके बावजूद अपने साथी ओम भाई के प्रयास से फिर से तत्काल ट्रेन कर कर हमने प्रभु का दर्शन किया। प्रभु जगन्नाथ की माया ही निराली है।उन्होंने आखिरकार सभी मित्रों को परिवार समेत दर्शन का सौभाग्य दिलाया। प्रभु की इसी भक्ति भावना की ही देन है कि लाखों की संख्या में होने वाली भीड़ के बावजूद हर व्यक्ति जय जगन्नाथ, जय जगन्नाथ कहते हुए प्रभु के समीप पहुंच जाता है। मां को लंबे समय से चलने फिरने में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए पहले यह तय था कि वह घर पर ही रहेंगी। हालांकि अचानक रिंकू भाई और मनोज मामा के समझाने से वह भी अचानक प्रभु जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए तैयार हो गईं। यह प्रभु की शक्ति ही थी की मां ने भी सोनू भाई के प्रयास से पुरोहित महोदय के सौजन्य से आखिरकार प्रभु का दर्शन किया। लंबी कतार में लगे हम सब अचानक हुई बारिश में एक तरफ भीग रहे थे, तो दूसरी तरफ प्रभु दर्शन को आतुर नजर आ रहे थे। पुरी स्टेशन पहुंचने के बाद ही सबसे पहले यही तय था कि प्रभु जगन्नाथ का दर्शन किया जाएगा। ऐसे में तय समय पर सभी लोग अपने-अपने तरीके से मंदिर परिसर पहुंचे और मंदिर का भ्रमण करते हुए सीढ़ियां चढ़ते हुए प्रभु के दर्शन किए।जय जगन्नाथ।

यात्रा वृत्तांत की अगली कड़ी फिर कभी।वैसे बार बार ऐसा प्रतीत हो रहा है कि समुद्र की लहरें हम सबको बुला रही हैं। यह शायद प्रभु की एक माया ही है कि आप वहीं स्वयं को महसूस करने लगते हैं। 

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