जीवन...
आप लाख नकारात्मकता भरी दुनिया में जी रहे हों लेकिन सकारात्मकता वाले लोग भी यहीं भरे पड़े हैं। यदि आपके आसपास नकारात्मक विचारधारा के लोग हैं, तो उसके विपरीत सकारात्मक विचारधारा के लोग भी मौजूद हैं। कई बार लोगों से विश्वास अडिग नहीं हो पाता यानी कि विश्वास करने में समय लगता है। लेकिन जहां अविश्वास मन में घर करता है ,तुरंत विश्वस्त लोग सामने आकर धमक जाते हैं या यूं भी कहे कि कुछ ऐसा कर जाते हैं की नकारात्मकता विचार तो दूर अविश्वास की भावना भी आसपास नहीं फटकती है। दरअसल आपके आसपास ऐसे अपनों और मित्रों का होना बहुत जरूरी है। ऐसा अक्सर महसूस होता है कि इस मामले में काफी सौभाग्यशाली हूं कि उच्च विचार वाले व हमेशा सकारात्मक रहने वाले अपने व करीबी मित्र मिले हैं। वैसे कुछ अपनों ने अच्छा सबक भी दिया है, इससे काफी सीख भी मिली है, लेकिन ऐसे भी अपने हैं जो कि दृढ़ता के साथ सभी प्रकार के निर्णय में साथ खड़े हैं। उन्होंने कभी भी अपने को हारने नहीं दिया है। शुरू से ही जीतने की प्रवृत्ति रही है। ऐसे में पॉजिटिव ऊर्जा वाले दोस्तों का साथ इस जीत के स्वाद को और बेहतर बनाता रहा है। ईश्वर सभी को सद्बुद्धि दें आगे बढ़ाएं यही हमेशा कामना रहती है। कामना रहनी भी चाहिए। यदि सब बढ़ेंगे तो आप बढ़ेंगे। सब खुश रहेंगे तो आप खुश रहेंगे। यह हमेशा याद रखता हूं कि अपना व्यवहार बातचीत और लोगों के हित के बारे में सोचना ही बेहतर है अन्यथा जीवन का अर्थ भी क्या है। यह मानव जीवन अनमोल है। समझने की जरूरत है कि किसी प्रकार का घमंड, जलन, मन में द्वेष की भावना रखकर आप ऊपर नहीं जा सकते। अपने विचारों में सबकी बेहतरी, अपना और मित्रों के प्रति हमेशा अच्छी भावना रखना ही आपको और आगे लेकर जा सकती है। यह भावना किसी पर प्रहार नहीं है।बस यूं ही।अन्यथा न लें ।
कुछ लेखकों की शायरी पर भी गौर फरमाएं मजा आएगा...
ज़िन्दगी में अपनापन तो हर कोई दिखाता है
पर अपना कौन है ये वक्त बताता है।
अपने ही अपनों से करते है अपनेपन की अभिलाषा,
पर अपनों ने ही बदल रखी है अपनेपन की परिभाषा।
काश ये लोग समझ जाए कि रिश्ते,
एक दूसरे का ख्याल रखने के लिए बनाये जाते है,
ना कि इस्तेमाल करने के लिए।
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अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को
मैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं
- आसी उल्दनी
मुझ को एहसास है लेकिन तुझे एहसास नहीं
तेरे दामन की हवा मेरे लिए रास नहीं
- नरेश कुमार शाद
वो रफ़्ता रफ़्ता ज़िंदगी से दूर क्या हुए
एहसास ज़िंदगी का भी मरता चला गया
- शौक़ मुरादाबादी
जीवन का फलसफा सिखाता यह गीत भी...
ये जीवन है
इस जीवन का
यही है, यही है, यही है रंग रूप
थोड़े ग़म हैं, थोड़ी खुशियाँ
यही है, यही है, यही है छाँव धूप
ये ना सोचो इसमें अपनी
हार है कि जीत है
उसे अपना लो जो भी
जीवन की रीत है
ये ज़िद छोड़ो, यूँ ना तोड़ो
हर पल एक दर्पण है...
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