दीघा सी बीच...रोमांच का सुहाना सफर...
दीघा समुद्र...रोमांच का अनूठा क्षेत्र...
पश्चिम बंगाल में वैसे तो घूमने के लिए अनेकों जगह है। लेकिन आस-पास समुद्र की सुंदरता देखनी हो तो लोग दीघा जरूर पहुंचते हैं। दीघा की खूबसूरती का आलम ऐसा है कि आसानी से ट्रेन से लेकर बस के माध्यम से आप पहुंच सकते हैं। यदि पहली बार आप दीघा समुद्र तट घूमने की योजना बना रहे हैं, तो यहां काफी कुछ रोमांच का अनुभव आप ले सकते हैं। सबसे पहले जरूरी है कि आप ट्रेन की टिकट जरूर कंफर्म कर लें। यदि बस से जा रहे हैं, तो बस की टिकट पहले ही बुक कर लें। वैसे ट्रेन की यात्रा काफी सुलभ कही जा सकती है। खासकर यदि आप परिवार के साथ घूमने की योजना बना रहे हैं, तो यह जरूरी है। वैसे तो दीघा, न्यू दीघा व मंदारमनि में हमेशा ही राज्य के साथ ही आस-पास के राज्यों के पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। इसकी वजह है कि महज चार से पांच घण्टे में आप हावड़ा से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। यात्रा के पहले ही अगर आप चाहें तो होटल बुक कर सकते हैं। वैसे दीघा में होटलों की कमी नहीं है, ऐसे में आप वहां पहुंचकर भी होटल ले सकते हैं। आपकी सुविधा के अनुसार यहां पर होटल मौजूद हैं। ज्यादातर होटल समुद्र तट के निकट हैं। कई होटलों में स्विमिंग पूल से लेकर, बच्चों के खेलने के लिए पार्क, भोजन व चायपान के प्रबंध भी हैं। दीघा समुद्र में सुबह व शाम का नजारा काफी रोमांचक रहता है। ऐसे में इसे मिश न करें। खासकर सूर्य की पहली किरण आने से पहले समुद्र तट पर रहना अपने आप में ही काफी रोमांचक रहता है। दीघा में घूमने के साथ ही पास ही उदयपुर समुद्र तट भी है। यह दीघा से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित है। इस जगह की सुंदरता देखते ही बनती है। इस समुद्र तट पर आपको लाल केकड़े भी दिख जाएंगे। ऐसे में परिवार के साथ जाने पर थोड़ा सावधानी भी बरतने की जरूरत है। वैसे यह केकड़े कोई नुकसान नहीं पहुंचाते। यह भी कहा जा सकता है कि यह समुद्र तट की खूबसूरती में चार चांद लगाते नजर आते हैं। समुद्र तट पर देवदार के पेड़ भी काफी संख्या में बिखरे हुए हैं। यहां तट के निकट ही छोटे मोटे पत्थरों व पहाड़ों के बीच से होकर आप काजू के बगीचे को भी आसानी से देख सकते हैं। बड़ी संख्या में यहां बड़ी-बड़ी नौका भी खड़ी मिलती है। मछुआरों का भी जमावड़ा यहां नजर आता है। ऐसे में सेल्फी लेने के लिए काफी लोग इसे बेहतरीन जगह भी मानते हैं। तस्वीर पसंद करने वालों के लिए यह काफी खास जगहों में से एक है। दरअसल उदयपुर सी बीच या समुद्री तट पश्चिम बंगाल व ओडिशा की सीमा पर स्थित है। वैसे यह ओडिशा का हिस्सा है। हाल के वर्षों में यह लोगों के बीच लोकप्रिय समुद्र तट बन चुका है। यह ओडिशा की सीमा पर स्थित है और न्यू दीघा और तलसारी के बीच बसा हुआ है। यदि परिवार के साथ दीघा और मंदारमनी की यात्रा कर रहे हैं तो उदयपुर बीच की यात्रा भी की जा सकती है। यह न्यू दीघा से महज 30 से 35 मिनट की दूरी पर ही स्थित है।
यदि आप कार से गए हैं, तो कहना ही क्या। अन्यथा आसानी से ई-रिक्शा (टोटो) आपके होटल के आस-पास ही मिल जाएगा। यह याद रखना होगा कि इसी से आपको जाने के साथ ही वापसी भी करनी पड़ सकती है। यहां काफी नियमानुसार ही ई-रिक्शा के रूट व किराये तय किए गए हैं। स्टेशन के बाहर ई रिक्शा, मोटरवैन मिल जाएगा। वैसे तो समुद्री तट पर खाने पीने की अनेकों चीजें मिल जाएंगी। लेकिन आप चाहें तो आस-पास मौजूद एक से बढ़कर एक रेस्तरां में मौजूद सभी प्रकार के व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं। वैसे यदि आप वेजिटेरियन हैं तो थोड़ी अतिरिक्त मेहनत रेस्तरां को खोजने में करनी पड़ सकती है। वैसे उदयपुर सी बीच अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। परिवार, दोस्तों और करीबी लोगों के साथ यहां जरूर पहुंचने का प्रयास करें। समुद्र तट पर लंबी सैर, स्पीड बोट जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद भी आप ले सकते हैं। साथ ही बीच पर बाइक राइड व बच्चों के लिए एक से बढ़कर एक स्पोर्ट्स एक्टिविटी भी मौजूद है। समुद्र तट पर स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजन मौजूद हैं, जिनमें झींगा और मछली करी जैसे समुद्री भोजन भी शामिल हैं। नारियल पानी यानी कि डाब सस्ती कीमतों पर आप ले सकते हैं।
यदि आपको मंदिर में जाकर मत्था टेकना है, तो महज आधे घण्टे से लेकर एक घण्टे की दूरी पर स्थित चंदनेश्वर मंदिर जो कि ओडिशा के बालेश्वर जिले के चंदनेश्वर में स्थित एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है, वहां पहुंच सकते हैं। यहां एक विशाल वार्षिक मेला भी लगता है। इस दिन काफी भीड़ श्रद्धालुओं की होती है। उदयपुर सी बीच के निकट ही यह मंदिर स्थित है। ओडिया नव वर्ष महाविशुव संक्रांति का दिन मंदिर के परिसर के आसपास बहुत प्रसिद्ध है। स्थानीय रूप से इसे उदय पर्व, नीलकंठ शिव की पूजा के बाद नीला पर्व, चडका यात्रा कहा जाता है। लाखों लोग मंदिर के आसपास इकट्ठा होते हैं और अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए उपवास करते हैं। इसे पुराने ओडिशा मंदिरों की विशिष्ट कलिंग वास्तुकला शैली में बनाया गया है। मंदिर के निकट ही एक तालाब भी है, जिसे कि काफी पवित्र माना जाता है। मंदिर के आस-पास पूजन सामग्री की दुकानें मौजूद हैं। आप अपनी इच्छा के अनुसार पूजन सामग्री ले सकते हैं। लोग यहां भी पूजा करते नजर आते हैं। इसके अलावा उदयपुर सी बीच व दीघा के निकट कई छोटे बड़े और भी मंदिर हैं, जो कि कला की अनूठी बानगी भी पेश करते हैं। इन मंदिरों में पहुंचना यात्रा को और बेहतर बना सकता है। वैसे तो कई साल पहले न्यू दीघा जाना हुआ था, लेकिन आज एक बार फिर से दीघा की याद आई तो यह पोस्ट लिखा गया। बाद में अपने साले साहब को भी दीघा की सैर पर भेजा था। उन्हें भी जगह काफी रास आई। कुछ जानकारी वीकिपिडिया से भी ली गई। वैसे आप भी घूमने की योजना बना रहे हैं, तो जरूर पहुंचे। समुद्र के सूर्योदय व सूर्यास्त के समय का आनंद जरूर लें, क्योंकि मैं इसे मिस कर गया दोस्तों। वैसे तो यह बताना चाहिए कि कब जाएं यानी किस मौसम में।लेकिन सच कहूं तो किसी भी मौसम में जाया जा सकता है।
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