घर आया अनमोल...

अनमोल (खरगोश, रैबिट) का अल्हड़पन, फुदकना, कूदना और फिर उछलकर गोद में पहुंच जाना। यह बच्चों के लिए काफी रोमांचकारी अनुभ हो रहा था। मानो वह भी बच्चा ही हो। बच्चों के बीच अनमोल का आना किसी खिलौने से मिलना कम नहीं था। वह लगातार बच्चों के साथ खेल रहा था। अपनापन ऐसा कि सबका दुलारा हो गया था। चुन्नू, मुन्नू और गुन्नू के साथ ही साथ अभिमान, कर्त्तव्य,कुंज, कुकू का भी प्यारा हो गया था। अचानक एक सर्दी की रात में उसकी सांसें थम गईं। बच्चे कुछ समझ नहीं सके। सब बेबस और लाचार। सबके चेहरे पर मायूसी कि आखिर अनमोल कहां गया। आखिर उसे क्या हो गया। परिजनों ने बताया कि उसे डॉक्टर के पास लेकर जाया गया है। उसकी तबीयत खराब है। सुबह से ही सभी ने उसके बारे में परिजनों से पूछना शुरू कर दिया। आखिरकार दोपहर तक फिर से अनमोल (नए) की वापसी हुई। इसके बाद ही सबके चेहरों पर रौनक नजर आई। आखिर अनमोल सबके लिए अनमोल जो हो चुका था। अब एक बार फिर से सभी लोग पहले की तरह उसके साथ घुल मिल चुके हैं। अब एक बार फिर से वही स्नेह नजर आ रहा है। कई बार कई रिश्ते काफी अनमोल हो जाते हैं और उसका हमें आभास तक नहीं होता। भले ही इंसानों में आज एक दूसरे के प्रति प्रेम भावना कम होती जा रही है , लेकिन आज भी जानवरों के प्रति या यूं कहें कि पालतू जानवरों के प्रति एक दूसरे का स्नेह देखते ही बनता है । कम से कम हमें पशुओं से सीखने की जरूरत है कि हम एक दूसरे के प्रति खासकर रिश्तों के प्रति ईमानदार बने रहे हैं और प्रेम भावना बनी रहे। एक दूसरे से जुड़े रहें और प्रेम बरसाते रहें क्योंकि हर रिश्ता अनमोल है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अमेरिका से आया मेरा दोस्त

समय निकालें अपनों के लिए

दीघा सी बीच...रोमांच का सुहाना सफर...