वैवाहिक यात्रा

वैवाहिक यात्रा में कुछ फिल्मी जैसी चीजें न घटित हों, तो ऐसी यात्रा थोड़ी निरस सी लगती है। तो चलिए वैवाहिक वर्षगांठ पर कुछ फिल्मी हो जाएं, बाकि आशीर्वाद और शुभकामना तो आप सब देंगे ही। सच कहें तो पत्रकारों का जीवन भी शायद अजीबो गरीब होता है। हरदम व्यस्त। अपने में मग्न। यूं कहें, मस्तमौला। ऐसे में अगर जीवनसंगिनी सही मिल जाए, तो यह रास्ते थोड़े सुगम हो जाते हैं। अपने साथ भी ऐसा ही हुआ।दीपिका के तौर पर जीवनसंगिनी ने हर मोड़ पर ही साथ दिया है। हर चुनौती को हम साथ ही लेकर चल रहे हैं। यह साथ यूं ही निरन्तर जारी रहे। कुछ ऐसी ही अपनी वैवाहिक यात्री भी रही है, जिसका जिक्र ना करना बेमानी होगी। साल 2015। कर्नाटक के बेंगलूरू व तमिलनाडु के चेन्नई में भीषण बारिश व उसके बाद बाढ़ की भयावह स्थिति हो गई थी। यह जिन लोगों ने सुना होगा, या शायद खबरों में पढ़ा होगा, वह जानते हों।हालांकि बाढ़ की वीभिषिका में फंसने वालों का अनुभव और भयावह रहा होगा, यह आप समझ सकते हैं। तारीख तय थी। ट्रेन के बारे में लगातार जानकारी ले रहा था। बेंगलूरू से आने वाली ट्रेनों को कोयंबटूर न लाकर काटपाड़ी से ही डायवर्ट किया जा रहा था। इसकी भनक लग चुकी थी। लगातार बारिश बढ़ती जा रही थी। ऐसे में समझदारी दिखाते हुए चुपचाप शहजाद जी और राहुल जी से सलाह करके काटपाड़ी के लिए निकल गया। कुछ ही घंटों में काटपाड़ी था। हमारी दिल्ली वाली बुआ के लड़के यानी कि राकेश भैया उर्फ शिब्बू भैया को भी कहा कि साथ ही हों लें। ट्रेन का इंतजार काटपाड़ी में कर रहा था। हालांकि हर पल ट्रेन के विंलब होने की खबर आ रही थी। स्टेशन पर वैसे मित्र सुरेशमूर्ति जी साथ आ गए थे। वह घर से खाना भी लेकर आए। इधर ट्रेन लगातार लेट होती जा रही थी। इस बीच वीआईटी के एक छात्र आकाश सेंगर से भी मित्रता हो गई। हालांकि घर पहुंचने की चिंता थी। ट्रेन आई लेकिन सुबह वाली शाम को। ट्रेन में बैठ भी गए। ट्रेन चल भी दी। इस बीच जिधर से ट्रेन गुजर रही थी, हर तरफ रेलवे ट्रैक पर भी पानी भरा दिख रहा था। आखिरकार किसी प्रकार ट्रेन चल पड़ी। घर पहुंचे दो दिन बाद। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि ट्रेन की असल यात्रा है, जो कि शादी के पहले मुझे करनी पड़ी। इस बीच काफी लोगों का फोन भी लगातार आ रहा था। भाई साहब ने कहा कि मैं फ्लाईट से आऊंगा।लेकिन उस साल बाढ़ के कारण एयरपोर्ट से लेकर रेलवे ट्रैक पर पानी भर गया था। कुछ समय तक बड़ी संख्या में ट्रेन व फ्लाईट सेवा बंद करनी पड़ी थी। ऐसे में वह नहीं आ सके। लेकिन दुल्हा किसी प्रकार पहुंच ही गया। तो चलिए बधाई दीजिए, हमें वैवाहिक वर्षगांठ की । 7 दिसंबर का दिन भूलने वाला नहीं है, बल्कि हमेशा याद रखने वाला और याद आने वाला है।

वैसे थोड़ा सा माहौल को और कुहासामय करने की जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि जो लोग भी पहुंचे उन्होंने बारात की यात्रा में जबरदस्त कुहासा का सामना किया। वह भी उस रात को शायद नहीं भूले होंगे ,क्योंकि गाड़ी कुछ कदम चलते ही रोकनी पड़ती थी। कुहासे की चादर से पूरा रास्ता लिपटा हुआ था । ऐसे में जो यात्रा आधे घंटे की हो सकती थी वह तकरीबन 3 घंटे में तय करनी पड़ी। ससुराल तो वैसे आजमगढ़ में ही है लेकिन घने कुहासे के कारण बारात काफी देर पहुंची और इस बीच जो मित्र बाहर से आ रहे थे वे भी रास्ते में फंसे थे। उनका लगातार फोन आता रहा। जयमाल के लिए जैसे ही दीपिका आईं(हमारी पत्नी) पहली बार उनके दीदार हुए।जायज सी बात है बड़ी चुनौती के बाद हम दोनों का मिलना जो हो रहा था।

वैसे तो काफी कुछ लिखने को है लेकिन आप समझेंगे कि ज्यादा ही फिल्मी हो गया सो यहीं समापन। अब तो हमारे बिटवा और बिटिया भी हैं। समय भाग रहा है लेकिन कमबख्त रोमांटिसिज्म जाने का नाम नहीं लेता। 

वैसे कहानी में एक और ट्विस्ट भी है,जिसका जिक्र करना तो बनता ही है। 2015 में मध्य प्रदेश से इटारसी में बहुत बड़ा केबल फॉल्ट हुआ था। इस कारण बड़ी संख्या में ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था। यहां तक कि स्थिति ऐसी हो गई थी कि ट्रेनों का संचालन मैनुअल तौर पर काफी समय तक करना पड़ा था । इस तकनीकी गड़बड़ी को ठीक करने में काफी समय लग गया था। अपनी होने वाली वाइफ को देखने की तमन्ना लिए मैंने ट्रेन की टिकट तो ली थी, लेकिन ट्रेन कैंसिल हो गई थी। ऐसे में निराशा इधर भी थी उधर भी थी । इससे स्पष्ट है कि शादी के पहले मैं अपनी वाइफ को देख भी नहीं सका था यानी कि फेस टू फेस भी नहीं हो सका था। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि हमारे दिल पर क्या गुजर रही होगी। 

 मिलना वह भी ठीक शादी में। पार्थ भैया वैसे भी कहते थे शादी के समय यह भी कम ही छुट्टी यह लड़का लेगा। वास्तव में काफी कम छुट्टी ही दूरी के कारण मिली, लेकिन जो भी छुट्टी मिली जोश सर के माध्यम से शानदार रही। हम दोनों पर बड़ों का आशिष बना रहे।सब मिलकर आगे बढ़ें यही कामना है।खुश रहें और खुशियां बिखेरें।

वैसे एक गीत गुनगुनाना ही होगा इस बार के शादी के सालगिरह पर...

तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है, तेरा साथ है तो अंधेरों से भी मिल रही रोशनी है, तेरा साथ है तो...

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