नहीं मिल रहे खेतीहर कामगार


खेती व किसानी ही हमारे देश की रीढ़ की हड्डी है। ऐसे में किसानों के लिए केंद्र से लेकर राज्य सरकारों ने अलग-अलग योजनाएं पेश की हैं। हर साल ही खेती के साथ ही किसानों के हितों का ध्यान सरकारें अपनी बजट में रखती हैं। इस बीच सोचने वाली बात है कि अचानक काफी जगहों पर खेतीहर कामगारों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसकी अलग-अलग वजहें लोग बता रहे हैं। एक वरिष्ठ उद्योगपति ने बातों ही बातों में बताया कि काफी समय से विशेषकर कोविड महामारी के बाद सरकारों ने अनाज निःशुल्क देना शुरू कर दिया। ऐसे में राशन निःशुल्क मिलने लगा। हालांकि सबसे बड़ी परेशानी दिखी अनाज के बाद उसे पकाया कैसे जाए?इसकी वजह है कि इसके बाद ईंधन से लेकर तेल, मसाले तक की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद इन सबका भी जुगाड़ लोगों ने कर लिया। देखा जा रहा है कि खेतीहर कामों के लिए कामगार मिलना हाल के वर्षों में काफी मुश्किल साबित हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार झा ने कहा कि दरअसल काफी लोगों को काफी योजनाएं निःशुल्क मिल रही हैं। इससे लोगों में काम कम करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है। संभव है कि यह भी एक वजह है कि कामगार अब कम मिल पा रहे हैं। यदि मिल भी रहे हैं तो वह मेहनताना अधिक मांग रहे हैं, या यूं कहें कि महंगाई के अनुसार पैसे मांग रहे हैं। यदि जल्द इस पर हल नहीं निकला तो आने वाले समय में परेशानी बढ़ेगी।

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