अविस्मरणीय यात्रा
अविस्मरणीय यात्रा इसे ही कहते हैं। यात्राएं ऐसी ही होती हैं। पुरी जगन्नाथ धाम के लिए हम सब मित्रों की तैयारी 4 महीने पहले से चल रही थी। टिकट भी हम सब ने पहले ही करवा लिया था।सपरिवार पुरी जाना है यह तय था मां को साथ लेकर जा पाऊंगा या नहीं इसे लेकर असमंजस में था। लेकिन इच्छा थी कि एक धाम उसे करवा दिया जाए। ऐसे में पिताजी को गांव की यात्रा पर भेज कर मां का टिकट भी आखिरकार करवा लिया वह भी छोटे भाई के लाख समझाने के बाद ही वह मानी। हमारी यात्रा का दिन बिल्कुल तय था। सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था। यात्रा के पहले कम से कम चार से पांच बार बैठक हो चुकी थी। अचानक हमारी ट्रेन जिससे हमें जाना था वह दक्षिण पूर्व रेलवे की ओर से मरम्मत कार्य के कारण रद्द हो गई। अब एक बार फिर से सभी लोगों में खलबली मच गई कि यात्रा कैसे संपन्न होगी। ऐसे में हमारे हरदिल अज़ीज़ ओम भाई काम आए। उन्होंने तत्काल तौर पर तत्काल टिकट करवा कर हमें राहत प्रदान की और यात्रा आरंभ हुई। होटल पहले ही बुक था ,इसके लिए हमारे अप्पू भाई का बड़ा सहयोग रहा। पुरी स्टेशन पहुंचने के बाद हम सीधे ऑटो लेकर होटल पहुंचे लेकिन वहां चेक इन का टाइम सुबह 8:00 बजे था और हमारी ट्रेन सुबह 4:30 बजे ही पुरी पहुंच चुकी थी। जायज सी बात है कि हम सुबह सभी लोग जल्द से जल्द होटल के कमरे में पहुंचाना चाह रहे थे। ताकि जगन्नाथ धाम का दर्शन सुबह कर लिया या जाए और उसके बाद समुद्र की लहरों से आंखें दो चार कर लें। यहां आंखें दो चार करने का अर्थ है कि हमारे ऐसा व्यक्ति पानी में स्नान न करके समुद्र की लहरों को निहारना ही ज्यादा पसंद करता है। इसका एक अलग ही आनंद है। यहां सभी से यह सलाह होगी कि किसी भी यात्रा को बनाने से पहले आप होटल में चेक इन करने का समय भी जरूर ज्ञात लें और उसी के अनुसार आप अपनी यात्रा बनाएं। इसके अलावा जरूरी नहीं है कि होटल आप पहले ही बुक करें। होटल एक से बढ़कर एक पुरी में मौजूद है। मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है कि उड़ीसा में पर्यटन और परिवहन के साथ ही साथ होटल व्यवसाय बड़े पैमाने पर चलता है ,जिससे कि लाखों लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हुए हैं। यह लोगों के आजीविका का एक बड़ा माध्यम है। प्रभु जगन्नाथ के दर्शन करवाने में सोनू भाई का काफी बड़ा योगदान रहा। उनके काफी करीबी ब्राह्मण देवता के सौजन्य से मां ने भी प्रभु जगन्नाथ के दर्शन किए। अचानक झमाझम बारिश के कारण सभी लोग भीग चुके थे। इसके बावजूद प्रभु के दर्शन करने के लिए सभी लोग आतुर थे। प्रभु के दर्शन के बाद भी सभी लोग और समय भीगने के बाद भी प्रभु की शरण में बिताने को बेताब थे। यही वजह है कि जगह-जगह सीढ़ी पर लोग बैठ जा रहे थे। तकरीबन 50 से अधिक लोगों की टीम जब एक साथ किसी यात्रा पर पहुंचती है तो थोड़ा बहुत इधर उधर भी होना संभव ही रहता है। ऐसे में हमारी एक टीम ब्राह्मण देवता के साथ रही वहीं दूसरी टीम गुड्डू भाई के साथ प्रभु भक्ति में लीन नजर आई। जगन्नाथ मंदिर में पहुंचने के बाद आप भोग अवश्य ग्रहण करें। मंदिर का प्रसाद और भोग बड़े ही सलीके से बनता है और इसका एक अलग इतिहास है। मंदिर के सेवायत ही यहां पर तत्पर नजर आते हैं ।मिट्टी के हांडी में तैयार प्रसाद एक अलग ही आत्मिक अनुभूति कराता है। इसका एक अलग ही आनंद है। मंदिर में रोजाना ही हजारों भक्तों की भीड़ रहती है। इसके बावजूद प्रबंधन काफी जबरदस्त है। यही वजह है कि किसी को भी किसी प्रकार से प्रभु के दर्शन में कोई परेशानी नहीं होती है। यदि उड़ीसा या पुरी को मंदिरों का शहर कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा।प्रभु जगन्नाथ के दर्शन के बाद मैंने साक्षी गोपाल का भी दर्शन किया। वहां की भी काफी मान्यता है। मंदिर की अद्भुत कला के सभी लोग कायल हो जाते हैं। ओम भाई ने बताया कि यदि किसी को अलग-अलग जगह को घूमना है तो सबसे पहले उन्हें भुवनेश्वर जाकर नंदनकानन, कोणार्क मंदिर व आसपास के स्थलों को घूम लेना चाहिए। इसके बाद जगन्नाथ धाम दर्शन के लिए पूरी जाना चाहिए।
वैसे तो पुरी में खाने पीने के लिए एक से बढ़कर एक रेस्तरां मौजूद है, लेकिन यदि किसी से इस बारे में सलाह मशविरा करके जाएं तो ही अच्छा है। वैसे हमने एक दिन इस्कान पुरी के प्रसाद को ग्रहण किया, जो की काफी सात्विक भोजन था। जरूरी नहीं किया भोजन ही सबको पसंद आ जाए।
खैर हम बात करते हैं, सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे की जो कि समुद्र की लहरें हैं। लोग पुरी में प्रभु जगन्नाथ के दर्शन के साथ ही साथ समुद्र की लहरों में अठखेलियाँ करने भी पहुंचते हैं। समुद्र की लहरों के बीच लोग सुबह से लेकर शाम शाम से लेकर रात तक बिता देते हैं और उन्हें पता नहीं चलता है।समुद्र की लहरों के किनारे काफी भीड़ होती है। ऐसे में यदि परिवार के साथ व बच्चों के साथ जाएं तो सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें और बच्चों का तो विशेष ध्यान रखना जहां जरूरी है। शुरुआती दौर में कैटरिंग की प्लानिंग थी। लेकिन वह प्लानिंग रद्द हो गई। खानपान पर खर्च अधिक होता है ऐसे में यदि बड़े ग्रुप में है तो कैटरिंग करना ज्यादा बेहतर हो सकता है। नंदनकानन और कोणार्क मंदिर भी हम पहुंचे। लेकिन कोणार्क मंदिर का एक निश्चित समय है। ऐसे में कोणार्क मंदिर जाना हो तो समय-समझ बूझ कर जाना चाहिए। नंदनकानन जाना है तो केवल नंदनकानन जाना है, क्योंकि यहां बहुत समय लगता है। वैसे बच्चों के लिए जंगल सफारी काफी खास हो सकता है। एक बेहतरीन अनुभव बच्चे यहां प्राप्त कर सकते हैं। समुद्र किनारे बरबस ही लोगों को आकर्षित करती हैं। सुबह और शाम का समुद्र का नजारा बिल्कुल अद्भुत होता है। ऐसे में कोशिश करें कि इस दोनों समय में समुद्र का आनंद लें समुद्र के किनारे बैठकर चाय या नारियल पानी पीना काफी बेहतर हो सकता है। दोपहर के समय ज्यादातर समुद्र के किनारे की दुकान बंद रहती है। शाम के समय खाने पीने के लिए एक से बढ़कर एक आइटम आपको यहां मिल जाएगा। ऐसे में स्थानीय व्यंजनों का भी जमकर आनंद लें। पकौड़े से लेकर मक्के का स्वाद लिया जा सकता है। पुरी के काकातुआ में सुबह का नाश्ता किया जा सकता है। किसी एक मित्र का नाम इस सफर में नहीं ले सकता जिन्होंने इसे सुहाना बनाया। एक बार सभी लोग कहें जय जगन्नाथ। एक साथ इतने लोगों की यात्रा केवल मात्र गुड्डू भाई के द्वारा ही सम्पन्न हो सकी। उनकी कर्मठता को सलाम। पुरी के प्रभु जगन्नाथ में भी एक अलग प्रकार का सम्मोहन है। यही वजह है कि अक्सर ही बार-बार लोग यहां प्रभु दर्शन को पहुंचते ही हैं। एक आखरी सलाह यह रहेगी कि यदि यात्रा को और सुखद और मनोरम बनाना है तो कोशिश करें कि पुरी से आसपास के भ्रमण के लिए चार पहिया बुक करके ही यात्रा करें। इससे आप एक आरामदायक यात्रा का अनुभव कर सकेंगे। यहां एक से बढ़कर एक टूर एंड ट्रेवल्स की सुविधा मौजूद है।
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